top of page
Search

Ganesh Chaturthi Spacial information 2019

  • maheshkumarmilanka
  • Aug 25, 2019
  • 3 min read

इस साल गणेश चतुर्थी 2 सितंबर, सोमवार को मनाया जाएगा। इस खास दिन पर पूजन का शुभ मूहर्त दोपहर 11 बजकर 4 मिनट से 1 बजकर 37 मिनट तक है। पूजा का शुभ मूहर्त करीब दो घंटे 32 मिनट की अवधि है। भादो मास के शुक्लपक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है।  भगवान गणेश का जन्म भाद्रपद के शुक्लपक्ष की चतुर्थी को दिन मध्याह्र काल में, स्वाति नक्षत्र और सिंह लग्न में हुआ था। इसी कारण मध्याह्र काल में ही भगवान गणेश की पूजा की जाती है। इसे बहुत शुभ माना गया है। 

चतुर्थी का पर्व बहुत ही खास होता है। इस दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था। हर साल भाद्रपद मास में गणेश चतुर्थी मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी के दिन लोग खासतौर पर गणेश भगवान की पूजा करते हैं। महिलाएं इस दिन व्रत रहती हैं। इस साल गणेश चतुर्थी सितंबर माह में है, जिसको लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। इसलिए हम आपको बताने जा रहे हैं गणेश चतुर्थी की किसी तरह तैयारी करें, क्या शुभ मूहर्त है।

भारतीय पुराणों में गणेश जी को विद्या-बुद्धि का प्रदाता, विघ्न-विनाशक और मंगलकारी बताया गया है। हर माह के कृष्णपक्ष की चतुर्थी को संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत किया जाता है। 

हिन्दू धर्म में गणेश जी को प्रथम पूजनीय माना जाता है। हर शुभ कार्य से पहले गणेश जी की पूजा की जाती है। भगवान शिव और देवी पार्वती के पुत्र माने जाने वाले श्री गणेश जी के पूजा में उनकी आरती का विशेष महत्व है

सभी विघ्न दूर करने के लिए गणेश भक्त बप्पा की पूजा-अर्चना करते हैं साथ ही उनकी आरती भी गाते है। 

यहां देखें गणेश जी की आरती

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।

एकदंत, दयावन्त, चार भुजाधारी, माथे सिन्दूर सोहे, मूस की सवारी।  पान चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा, लड्डुअन का भोग लगे, सन्त करें सेवा।। .. जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश, देवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया, बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया।  'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।।  जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ..  माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा। 

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।  कामना को पूर्ण करो जय बलिहारी।

गणेश जी के इस मंत्र द्वारा सिद्धि की प्राप्ति होती है। एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।। महाकर्णाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।। गजाननाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।

श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा॥

इस मंत्र के द्वारा भगवान गणेश को दीप दर्शन कराना चाहिए- साज्यं च वर्तिसंयुक्तं वह्निना योजितं मया | दीपं गृहाण देवेश त्रैलोक्यतिमिरापहम् | भक्त्या दीपं प्रयच्छामि देवाय परमात्मने | त्राहि मां निरयाद् घोरद्दीपज्योत |

मंगल विधान और विघ्नों के नाश के लिए गणेश जी के इस मंत्र का जाप करें।

गणपतिर्विघ्नराजो लम्बतुण्डो गजाननः। द्वैमातुरश्च हेरम्ब एकदन्तो गणाधिपः॥ विनायकश्चारुकर्णः पशुपालो भवात्मजः। द्वादशैतानि नामानि प्रातरुत्थाय यः पठेत्‌॥ विश्वं तस्य भवेद्वश्यं न च विघ्नं भवेत्‌ क्वचित्‌।

निम्न मंत्र का जाप करने से गणेश जी बुद्धि प्रदान करते हैं:

श्री गणेश बीज मंत्र ऊँ गं गणपतये नमः ।।

भगवान गणपति की पूजा के दौरान इस मंत्र को पढ़ते हुए उन्हें सिन्दूर अर्पण करना चाहिए-

सिन्दूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम् | शुभदं कामदं चैव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम् ||

इस मंत्र के द्वारा भगवान गणेश को नैवेद्य समर्पण करना चाहिए-

नैवेद्यं गृह्यतां देव भक्तिं मे ह्यचलां कुरू | ईप्सितं मे वरं देहि परत्र च परां गरतिम् || शर्कराखण्डखाद्यानि दधिक्षीरघृतानि च | आहारं भक्ष्यभोज्यं च नैवेद |

भगवान गणेश की पूजा करते समय इस मंत्र को पढ़ते हुए उन्हें पुष्प-माला समर्पण करना चाहिए-

माल्यादीनि सुगन्धीनि मालत्यादीनि वै प्रभो | मयाहृतानि पुष्पाणि गृह्यन्तां पूजनाय भोः ||

गणपति पूजन के दौरान इस मंत्र के द्वारा भगवान गणेश को यज्ञोपवीत समर्पण करना चाहिए-

नवभिस्तन्तुभिर्युक्तं त्रिगुणं देवतामयम् | उपवीतं मया दत्तं गृहाण परमेश्वर ||

पूजा के दौरान इस मंत्र के द्वारा भगवान गजानन श्री गणेश को आसन समर्पण करना चाहिए-

नि षु सीड गणपते गणेषु त्वामाहुर्विप्रतमं कवीनाम् | न ऋते त्वत् क्रियते किंचनारे महामर्कं मघवन्चित्रमर्च ||

गणेश पूजा के उपरान्त इस मंत्र के द्वारा भगवान् भालचंद्र को प्रणाम करना चाहिए-

विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय लम्बोदराय सकलाय जगद्धिताय | नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते ||

इस मंत्र के द्वारा प्रातः काल भगवान श्री गणेश जी का स्मरण करना चाहिए-

प्रातर्नमामि चतुराननवन्द्यमानमिच्छानुकूलमखिलं च वरं ददानम् | तं तुन्दिलं द्विरसनाधिपयज्ञसूत्रं पुत्रं विलासचतुरं शिवयोः शिवाय ||

गणपति पूजन के समय इस मंत्र से भगवान गणेश जी का ध्यान करना चाहिए-

खर्व स्थूलतनुं गजेन्द्रवदनं लम्बोदरं सुन्दरं प्रस्यन्दन्मदगन्धलुब्धमधुपव्यालोलगण्डस्थलम | दंताघातविदारितारिरूधिरैः सिन्दूरशोभाकरं वन्दे शलसुतासुतं गणपतिं सिद्धिप्रदं कामदम् ||


Digital startup blog by Maheshkumar yadav

 
 
 

Comments


Post: Blog2_Post

Subscribe Form

Thanks for submitting!

9638979998

©2019 by digital startup for small business. Proudly created with Wix.com

bottom of page